मोटे अनाज की खेत
भारत सरकार मोटे अनाज की खेती को अधिक महत्वपूर्ण स्तर पर भेजने का प्रयास करती है। पालतू अनाज में गेहूं, चावल, जौ, मक्का, बजरा और धान, ज्वर, रागी आदि जैसे बजरा (श्री अन्न) की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि और किसान कल्याण विभाग (DA&FW) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के तहत न्यूट्री-अनाज (बाजरा) पर एक उप-मिशन लागू कर रहा है। ये अनाज भारत के स्वाभाविक संसाधन हैं जो देश में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देते हैं सन 2018-19 से 14 राज्यों के 212 में। NFSM-पोसकर अनाज के तहत नए, किसानों को उपज उत्पादन और स्वरूपीकरण, परिणामी प्रणाली आधारित प्रदर्शन, अधिसूचना जारी/संकरों के प्रमाण बीजों के उत्पादन और वितरण, समन्वित पोषक तत्व और कीट प्रबंधन तकनीकों पर राज्य/केंद्रों के माध्यम से प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। उन्नत कृषि उपकरण/उपकरण/संसाधन संरक्षण, जल बचत उपकरण,
इसके अलावा भारत सरकार 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स या मोटा अनाज वर्ष के तौर पर घोषित किया गया है. केंद्र सरकार बढ़ चढ़कर इस अनाज को प्रोत्साहित कर रही है और इसके प्रचार और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है. मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, कुट्टु, काकुन, चीना, सांवा, कोदो आदि शामिल हैं.
उप सहारा अफ्रीका और एशिया के लाखों छोटे किसान इन्हें आवश्यक मुख्य अनाज की फसलों के रूप में उगाते हैं. मोटे अनाज को गरीबों का अनाज भी कहा जाता है. इसके कई कारण हैं जैसे कि इसका इस्तेमाल भोजन, चारा और जैव ईंधन बनाने के लिए होता है.
पौधों की खेती के लिए सही सजीवीकरण, सूक्ष्म, और खेती करने के लिए तकनीकों का उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। अनाज को बोने से पहले खेत की तैयारी अच्छी तरह से जानी जानी चाहिए, जिसका सूक्ष्म उपयोग किया जाता है ताकि इसमें ऊर्जा और पोषक तत्वों के स्तर स्तर बने रहें। इसके अलावा, बीज उत्पादन, उन्नत तकनीकों का उपयोग, अनुकूलन का उपयोग और उचित समय पर फसल की सींचाई जैसे कार्य भी किसानों की खेती में अहम होते हैं। इसके अलावा, स्थानीय बाजार में अनुकूल उत्पाद और उचित शुल्क भी बढ़ने के लिए आवश्यक हैं।
भारत सरकार मोटे अनाज से किसान फायदा
मोटे अनाज जैसे चावल, गेहूँ, बाजरा आदि से किसान फायदा प्राप्त कर सकते हैं।
●बेहतर उत्पादकता: मोटे अनाज में उच्च मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जो उत्पादकता को बढ़ाते हैं। ये अनाज फसल के विकास में मदद करते हैं और फल-फूल के विकास में भी मदद करते हैं।
●बेहतर नकदी मुनाफा: मोटे अनाज की उच्च मांग के कारण, किसान अधिक मूल्य में अपनी फसल को बेच सकते हैं। इससे उन्हें अधिक नकदी मुनाफा प्राप्त होता है।
●ज्यादा रोकथाम और बचत: मोटे अनाज की धारा बहुत अधिक होती है, जिससे किसान अधिक समय तक अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। इससे उन्हें उत्पादों के नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।
●भूमि की गुणवत्ता को बनाए रखना: मोटे अनाज खेती में भूमि की गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद करते हैं। ये अनाज खेती के बाद बची खाद को बचाते हैं और उसे बारिश या बर्फानी हवाओं से नुकसान से बचाते हैं।
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